जाने क्यों मन होता है कुछ न कहूँ अपने बारे में;
मेरी लेखनी ही मेरे परिचय का ज़रिया बने ...
कविता बोले मै कौन हूँ,
फिर भी कभी लिखूंगी अपने बारे में ....
------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति '
Tuesday, 19 February 2013
डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ': मकसद
डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ': मकसद: मकसद तोह एक ही है ग़ालिब ! दरिया दोनों को पार करनी हय. तोह तू कश्ती कर ले ए ज़माने ! हमको तोह तैरना आता हय .
ISKA PIC KAHA GAYAAAAAAAAAA /SUNIT
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