Tuesday, 19 February 2013

डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ': मकसद

डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ': मकसद: मकसद तोह एक ही है ग़ालिब ! दरिया दोनों को पार करनी हय. तोह तू कश्ती कर ले ए ज़माने ! हमको तोह  तैरना  आता हय .

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