जाने क्यों मन होता है कुछ न कहूँ अपने बारे में; मेरी लेखनी ही मेरे परिचय का ज़रिया बने ... कविता बोले मै कौन हूँ, फिर भी कभी लिखूंगी अपने बारे में .... ------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति '
बिना स्वार्थ,कोई काम नहीं है,प्रेम करो या कर लो नफ़रत दया करो या नेह
बिना स्वार्थ,
ReplyDeleteकोई काम नहीं है,
प्रेम करो या
कर लो नफ़रत
दया करो या नेह