माना के गम आता है, आंधियाँ बनके !
तोह तू पर्वत की तरह तनके खड़ा
क्यूँ नहीं होता ।
-------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ' ।
तोह तू पर्वत की तरह तनके खड़ा
क्यूँ नहीं होता ।
-------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ' ।
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