जाने क्यों मन होता है कुछ न कहूँ अपने बारे में;
मेरी लेखनी ही मेरे परिचय का ज़रिया बने ...
कविता बोले मै कौन हूँ,
फिर भी कभी लिखूंगी अपने बारे में ....
------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति '
Sunday, 30 December 2012
मेरे शब्दों की इबारत
मेरे शब्दों की इबारत / है आईने जैसी ! जब भी मन हो / आना ! खुदको देख लेना ! कहीं ख़ुदा है / छुपा हुआ ! कहीं तूह मुस्कुराता है !
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