जाने क्यों मन होता है कुछ न कहूँ अपने बारे में; मेरी लेखनी ही मेरे परिचय का ज़रिया बने ... कविता बोले मै कौन हूँ, फिर भी कभी लिखूंगी अपने बारे में .... ------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति '
google se aproch nahi kiya ab tk kisi ne/ ye aaj ka pahla post show ho raha h
शब्द शक्ति है इबारत समर !अर्थ अमर !
तुम औ हम !प्रयोग हरदम !सफलतम !
google se aproch nahi kiya ab tk kisi ne/ ye aaj ka pahla post show ho raha h
ReplyDeleteशब्द शक्ति है
ReplyDeleteइबारत समर !
अर्थ अमर !
तुम औ हम !
ReplyDeleteप्रयोग हरदम !
सफलतम !