जाने क्यों मन होता है कुछ न कहूँ अपने बारे में;
मेरी लेखनी ही मेरे परिचय का ज़रिया बने ...
कविता बोले मै कौन हूँ,
फिर भी कभी लिखूंगी अपने बारे में ....
------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति '
Tuesday, 18 December 2012
हवाओ का रुख
अभी मुझको हवाओ का रुख देख लेने दे । ससुना है जहाज यही डुबोती है । ------------------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति ' '
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