जाने क्यों मन होता है कुछ न कहूँ अपने बारे में;
मेरी लेखनी ही मेरे परिचय का ज़रिया बने ...
कविता बोले मै कौन हूँ,
फिर भी कभी लिखूंगी अपने बारे में ....
------------------------------------------- डॉ. प्रतिभा द्विवेदी 'स्वाति '
Thursday, 29 November 2012
क्यूँ चुभोते हो ? नश्तर ! चाँद के दिल पर. ये पूछ्कर कि --- माथे पे दाग , क्यूकर है ? --------------------------------- प्रतिभा
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